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नरसिंह भगवान, विष्णु जी के चौथे अवतार हैं - आधे सिंह और आधे मानव रूप में। हिरण्यकशिपु का वध करने और भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए वे प्रकट हुए थे।*संक्षिप्त जीवनी:*- *कथा*: हिरण्यकशिपु को वरदान था कि न दिन में न रात में, न मनुष्य न पशु, न घर के अंदर न बाहर, न अस्त्र न शस्त्र से मरेगा। अपने पुत्र प्रह्लाद को विष्णु भक्ति से रोकने के लिए उसने बहुत कष्ट दिए। तब भगवान विष्णु गोधूलि बेला में, खंभे से प्रकट होकर नरसिंह रूप में आए और दरवाज़े की दहलीज़ पर अपनी जांघों पर लिटाकर नाखूनों से उसका वध किया।- *संदेश*: भक्त की रक्षा के लिए भगवान किसी भी रूप में आ सकते हैं। अधर्म का नाश निश्चित है।- *प्रमुख मंदिर*: आंध्र प्रदेश में अहोबिलम, कर्नाटक में सिम्हाचलम, तमिलनाडु में नामक्कल।- *नरसिंह जयंती*: वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है

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Malwa Nimar Anchal Samachar
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